हम सब मेहमान की अदायगी पेश कर रहे है। जब आने जाने का चक्कर चलता रहना है तो मेहमानी कब कम होने वाली है। कोई ना कोई आने जाने वाला वना ही रहता है। परंतु मेहमान अजीबो गरीब होते है जो आने से पहले ओले वनकर गडगडाहट करने लगते है। और अचानक अपनी ही फसल को चौपट कर देते है। भला ऐसे कौन काम के जो अपना ही क्या होता नही जानते वो कौन हैं हम मै से कोई अपना आने जाने वालों मै से। (१)प्रथम मेहमान तो वो है जो संमार्ग दिखाकर काटों करकट का पथ न चलने का आग्रह करके हम सब को एक स्वतंत्र रास्ता सुझाते है और आप भी अनमोल रिस्ता निभाकर अपनी मेहमानी सुख पूर्वक हमारे आपके पास से विदा होकर चले जाते है। (2)ऐसे मेहमान जो गले मै गरिष्ठ भोजन जैसे अटके हुऐ की भांति हमारे जीवन को जीने और न जीने को मजबूर करने के लिऐ आते है। उन्हे भी हमारी तरह मेहमान का दर्जा है। परंतु उन्हे वह पद पसंद नहीं है।

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