Makoy Labh- हर जगह मिलने यह वाला पौधा मकोय। यह बढ़े हुए यकृत और तिल्ली (एनलार्ज्ड लिवर एंड स्प्लीन) के इलाज़ में कारगर है। यह पीलिया, मुँह और पेट के अल्सर, और अस्थमा के इलाज में बहुत उपयोगी है। दस्त, दाँत और कान के दर्द, गठिया, जठर रोगों (गैस्ट्रिक डिज़ीजेज़), मूत्र विकार, पाइल्स, त्वचा रोगों और रतौंधी के इलाज़ में भी इसका उपयोग लाभकारी है। मकोय पाचन क्षमता और भूख बढ़ाने वाला एवं रक्त शोधक भी है। यह आमतौंर पर उवड जगह खेत अनुपयोगी जगह पर मिलता है । बुंदेल खंडमै तो यह हर कही और हर मोसम मै मिलता है ,, मकोय आयुर्वेद अनुसार, मधुमेहरोधी, कैंसररोधी, शोथरोधी, रोगाणुरोधी, एंटीसीज़र्स (दौरों की रोकथाम वाला) दर्दनाशक, मूत्र को बढ़ाने वाला, एंटिऑक्सीडेंट, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला है। ,इसकी पहचान, मकोय का पौधा मिर्च के पौधे के जैसा छोटा होता है इसकी पत्तियों और फल दोनों का भोजन में उपयोग होता है। मकोय का फल आकार में बहुत छोटा गोल, मटर के दाने से थोड़ा छोटा होता है। इसकी दो प्रजातियाँ प्रचलित हैं जिनका आहार में इस्तेमाल होता है।
मकोय की दो प्रजाति होती है-दोनों प्रजातियों के पके फल का रंग अलग होता है। एक का पका फल काला और दूसरे का मिश्रित नारंगी-लाल होता है। दोनों का ही कच्चा फल हरे रंग का होता है। नोट: गांव मै आंतरिक और वाह्य सूजन मैं यह रामवान का काम करता है । आमखास व्सक्ति इसे उपयोग करता है देहात का नागरिक सूजन गठिया वात वहुत सारे रोगो से दूर रहता है मकोय की चटनी वनाकर खाने से आंतरिक सूजन जड से खत्म हो जाती है इसके पत्तो का रस सूजन पर लगाने से तुरंत लाभ मिलता है ,गांव मै वहुत उपयोगी पौधे प्रचूर मात्रा में मिलते है इनके उपयोग से यहां लोग कम बीमार पडते है । अत: मै जडी बुटी यूज करने की सलाह देता हूं।


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